महराजगंज जनपद के विकास खण्ड सदर में राज्य वित्त से कराए गए विकास कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शासनादेश एवं वित्तीय नियमों की अनदेखी कर हाईमास्ट लाइट एवं स्ट्रीट लाइट निर्माण कार्य कराए जाने तथा निजी फर्म को भुगतान किए जाने के आरोपों पर अब जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य विकास अधिकारी महराजगंज श्री महेन्द्र कुमार सिंह (आईएएस) ने मामले की जांच हेतु दो सदस्यीय संयुक्त जांच समिति का गठन कर दिया है।

यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिकायतकर्ता उमाशंकर प्रसाद (निवासी ग्राम मथानिया) द्वारा प्रस्तुत स्मरण-पत्र के आधार पर की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विकास खण्ड सदर परिसर में हाईमास्ट लाइट का निर्माण कार्य शासनादेश के विपरीत निविदा प्रक्रिया अपनाते हुए कराया गया, जिसमें ₹2,29,093 का भुगतान मेसर्स स्वतंत्र इंटरप्राइजेज, खुटहां बाजार, महराजगंज को किया गया। इसी प्रकार ग्राम पंचायत सोनरा में स्ट्रीट लाइट के नाम पर ₹4,48,827 का भुगतान भी उसी फर्म को वित्तीय नियमों की अवहेलना करते हुए किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार इस संबंध में 28 नवंबर 2025 को भी प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके पश्चात जिलाधिकारी को स्मरण-पत्र प्रस्तुत कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई। आरोप यह भी है कि संबंधित फर्म की वैधानिक स्थिति संदिग्ध है तथा भुगतान प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां की गई हैं।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार जांच समिति में वरिष्ठ कोषाधिकारी, महराजगंज तथा अधिशासी अभियंता, निर्माण खण्ड (लोक निर्माण विभाग), महराजगंज को नामित किया गया है। समिति को निर्देश दिया गया है कि शिकायतकर्ता की उपस्थिति में स्थलीय एवं अभिलेखीय जांच कर एक सप्ताह के भीतर संयुक्त जांच आख्या प्रस्तुत की जाए।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि प्रारंभिक जांच वरिष्ठ कोषाधिकारी से कराते हुए प्रकरण की विस्तृत जांच सतर्कता विभाग से कराई जाए तथा जांच प्रक्रिया से जिला विकास अधिकारी और उपायुक्त मनरेगा को पृथक रखा जाए, जिससे निष्पक्षता बनी रहे।
इस प्रकरण ने एक बार फिर राज्य वित्त से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आरोप सही हैं या नहीं और यदि अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।