सरयू तट पर बना हेलीपैड रहस्य बना: कोई विभाग तैयार नहीं लेने को जिम्मेदारी, आईजीआरएस शिकायत में उलझा मामला

अयोध्या।

रामनगरी अयोध्या में सरयू नदी के किनारे बने हेलीपैड को लेकर प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरयू नगर विकास समिति, अयोध्या द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल (आईजीआरएस) पर दर्ज कराई गई शिकायत संख्या 40017725063337 में यह जानने का प्रयास किया गया कि सरयू नदी के तट पर बने हेलीपैड का निर्माण आखिर किस विभाग द्वारा कराया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक कोई भी विभाग इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

Oplus_131072

शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ एवं एनजीटी के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सरयू नदी, रेती और सोते की श्रेणी में परिवर्तन कर निर्माण कार्य कराया गया है, जो न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। इसके जवाब में अयोध्या विकास प्राधिकरण ने लिखित रूप से आईजीआरएस पर आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि हेलीपैड निर्माण के लिए दिनांक 10 जनवरी 2024 को समाचार पत्र में निविदा हेतु विज्ञापन प्रकाशित कराया गया था, लेकिन कोई भी निविदा प्राप्त नहीं हुई। बाद में माननीय प्रधानमंत्री के प्रस्तावित आगमन कार्यक्रम में परिवर्तन होने और हेलीकॉप्टर को साकेत डिग्री कॉलेज में उतारे जाने के निर्णय के कारण हेलीपैड निर्माण का कार्य स्थगित कर दिया गया।

प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि सरयू नदी के तट पर बने पक्के घाट और सीढ़ियों का निर्माण उनके द्वारा नहीं कराया गया है, बल्कि यह कार्य किसी अन्य विभाग द्वारा कराया गया है। वहीं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने भी लिखित में यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया है कि उसने सरयू तट पर किसी भी प्रकार का हेलीपैड निर्माण नहीं कराया।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली स्थिति यह है कि जिला प्रशासन को ही यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री और अन्य वीवीआईपी के हेलीकॉप्टर जिस हेलीपैड पर उतरते हैं, उसका निर्माण किस विभाग ने कराया। हर विभाग “मैया मोरी, मैं नहीं माखन खायो” की तर्ज पर जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है।

जानकारों का कहना है कि न्यायालय और एनजीटी के आदेशों के कारण सरयू नदी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण पर रोक है। ऐसे में यदि किसी विभाग ने नियमों को दरकिनार कर हेलीपैड का निर्माण कराया है, तो वह सीधे तौर पर कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएगा। यही कारण है कि कोई भी विभाग आगे आकर निर्माण की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं कर रहा।

अब सवाल यह उठता है कि जब हेलीपैड मौजूद है, उस पर हेलीकॉप्टर उतर रहे हैं, तो उसका निर्माण किसने कराया? सरयू नगर विकास समिति ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार विभाग व अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

error: Content is protected !!