रिपोर्ट – मनोज कुमार तिवारी
महराजगंज जनपद की सदर तहसील इन दिनों भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड संख्या–9 लोहिया नगर में बिना नक्शा स्वीकृत कराए हो रहे अवैध निर्माण और कब्जे के मामलों ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरोप है कि उप जिलाधिकारी सदर द्वारा न्यायालय से स्पष्ट रूप से निर्माण कार्य पर रोक लगाए जाने के बावजूद, तहसील और नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी खुलेआम आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता उमेश प्रसाद द्वारा जिलाधिकारी और गोरखपुर मंडल के आयुक्त को दिए गए शिकायती पत्रों में नायब तहसीलदार सदर श्री देशदीपक तिवारी, हल्का लेखपाल अमित पटेल, नगर पालिका के जेई और अन्य कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, रामप्रीत पुत्र घीसन निवासी लोहिया नगर द्वारा विवादित भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण किया जा रहा है। इस प्रकरण में उप जिलाधिकारी सदर द्वारा जांच के उपरांत निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया गया था, इसके बावजूद रात्रि के समय चोरी-छिपे कटरैन डालकर अवैध कब्जा कराया गया।
आरोप यह भी है कि 30 दिसंबर 2025 को नायब तहसीलदार और लेखपाल द्वारा मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को “वैध” बताने का प्रयास किया गया, जबकि न्यायालय से रोक के स्पष्ट आदेश मौजूद थे। यह घटना दर्शाती है कि किस प्रकार नियम-कानून को ताक पर रखकर भू-माफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि रात्रि में किए जा रहे अवैध कार्यों की सूचना देने के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह संदेह और गहराता है कि पूरा सिस्टम मिलीभगत से काम कर रहा है।
नगर पालिका के नक्शा स्वीकृति विभाग पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण कार्य को न सिर्फ नजरअंदाज किया गया, बल्कि रोक के बाद भी कर्मचारियों की सांठगांठ से अवैध कब्जा कराया गया। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचाती है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सदर तहसील महाराजगंज में यह कोई एक मामला नहीं है। भू-माफिया, भ्रष्ट अधिकारी और दलालों का एक मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है, जिसके आगे आम नागरिक की आवाज दबा दी जाती है। यदि कोई शिकायत करता है तो या तो उस पर कार्रवाई नहीं होती या फिर फाइलें दबा दी जाती हैं।
अब निगाहें जिलाधिकारी और मंडलायुक्त पर टिकी हैं कि वे इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह संदेश जाएगा कि महाराजगंज की सदर तहसील पूरी तरह भू-माफियाओं के कब्जे में है, जहां न्यायालय के आदेश भी बेअसर साबित हो रहे हैं।