नकल की जाँच या काग़ज़ी खेल? महाराजगंज में निष्पक्षता पर सवाल

रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी 

जनपद महाराजगंज में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान नकल के आरोप कोई नए नहीं हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे शासन स्तर तक पहुँच गया है। सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा जारी पत्र में विद्यालय कोड–1071 पर नकल कराए जाने की गंभीर शिकायत का संज्ञान लिया गया है। आरोप है कि परीक्षा केंद्र राम हर्ष इंटर कॉलेज, निचलौल में प्रबंधक के पुत्र द्वारा अपनी ही भतीजी की कॉपी विद्यालय के बाहर लिखवाई जा रही थी।

शिकायतकर्ता द्वारा यह भी बताया गया कि घटना के समय जनपदीय अधिकारियों से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। ऐसे में परिषद सचिव ने स्पष्ट निर्देश देते हुए परीक्षा केंद्र की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सहित समस्त तथ्यों की स्वयं जाँच कर रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा है।

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जिस जनपद में नकल के “कारोबार” के फलने-फूलने की चर्चा आम है, उसी जनपद के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को जाँच सौंपना क्या वास्तव में निष्पक्षता की गारंटी देता है? स्थानीय स्तर पर यह आशंका गहराती जा रही है कि कहीं यह जाँच भी काग़ज़ी आख्या और औपचारिक रिपोर्टों की ‘साँप-सीढ़ी’ बनकर न रह जाए।

इससे पहले भी राजकीय इंटर कॉलेज नौनिया में नकल के मामले पर खबरें सामने आई थीं, जिनमें कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे। अब निचलौल क्षेत्र के राम हर्ष इंटर कॉलेज का मामला सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था की साख फिर दांव पर है। यदि जाँच वही अधिकारी करें जिनकी कार्यप्रणाली पहले से संदेह के घेरे में रही हो, तो परिणाम पर भरोसा कैसे किया जाए?

शासन स्तर पर संज्ञान लेना सराहनीय है, लेकिन जाँच की स्वतंत्रता और पारदर्शिता ही असली कसौटी होगी। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए आवश्यक है कि जाँच निष्पक्ष हो, दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई हो और केवल औपचारिकता निभाकर मामले को ठंडे बस्ते में न डाला जाए। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि महाराजगंज में नकल के इस गंभीर आरोप का अंत सच में न्याय से होगा या फिर यह भी काग़ज़ों में दफन हो जाएगा।

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