जाँच में करोड़ों का भ्रष्टाचार उजागर, फिर भी कार्रवाई शून्य – शिकायतों और पत्राचार के बावजूद सोनबरसा ग्राम पंचायत में लटकती फ़ाइलें बढ़ा रहीं जनता की निराशा”

महराजगंज जनपद के सिसवा ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत सोनबरसा में भारी वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बावजूद कार्रवाई न होना अब ग्रामीणों में गहरी नाराज़गी और अविश्वास पैदा कर रहा है। शिकायतकर्ता संजय निषाद एवं अन्य ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत पर जिलाधिकारी महोदय के निर्देश पर गठित टीम ने 16 जुलाई 2025 को विस्तृत स्थलीय जाँच की। जाँच टीम में जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कन्हैया यादव तथा सहायक अभियंता राजत गुप्ता शामिल रहे।

जाँच आख्या में जो तथ्य सामने आए, वे चिंताजनक हैं।

बरसाती के घर से संजीव चौधरी के घर तक नाली मरम्मत का कार्य कागजों में दिखाया गया, जबकि मौके पर कोई कार्य न मिला। इसमें ₹37,171 के दुरुपयोग की पुष्टि हुई।

मिठाई गोंड से पंचायत भवन होते हुए पोखरी तक नाली निर्माण भी नहीं मिला, जबकि ₹1,14,220 व्यय दर्शाया गया।

जवाहीर से पंचायत भवन तक खड़ंजा मरम्मत बिल्कुल नहीं पाया गया, बावजूद इसके ₹63,622 की धनराशि खर्च दिखा दी गई।

स्ट्रीट लाइट प्रकरण में 100 लाइटें लगाने का दावा, परंतु गाँव में केवल 37 लाइटें मिलीं — यहाँ ₹3,43,710 के दुरुपयोग के संकेत हैं।

सफाई, चूना और फॉगिंग कार्य पर ₹8,01,868 का व्यय दिखाया गया, जबकि वास्तविकता पूरी तरह विपरीत मिली, और पत्रावली भी अधूरी मिली।

ग्राम सचिवालय कायाकल्प में टाइल्स आदि कार्य न पाये जाने पर ₹60,510 का दुरुपयोग दर्ज किया गया।


इन सभी बिंदुओं पर जाँच टीम ने स्पष्ट रूप से लिखा कि “प्रथम दृष्टया सरकारी धन का दुरुपयोग परिलक्षित होता है।”

इसके बाद भी कार्रवाई की दिशा में प्रगति नगण्य रही।
डीएम कार्यालय एवं जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए गए—ग्राम प्रधान संतरा देवी और सचिव बालेश्वर कुमार को नोटिस की प्रति भी दी गई। प्रथम अनुस्मारक (रिमाइंडर) तक भेजा गया, किंतु न तो जवाब मिला, न दंडात्मक कार्रवाई शुरू हुई।

लगातार आदेशों, पत्रों और अनुस्मारकों के बावजूद किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई न होना ग्रामीणों में गहरी निराशा का भाव पैदा कर रहा है।

 

जनता का प्रश्न सीधा है—
जब जाँच में भ्रष्टाचार प्रमाणित हो चुका है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?

सोनबरसा के लोग अब प्रशासन से केवल एक ही अपेक्षा रखते हैं—
दोषियों पर कठोर कार्रवाई और सरकारी धन की वसूली।

अन्यथा, ऐसे मामलों में बढ़ रही ढिलाई यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचार न सिर्फ पनप रहा है, बल्कि संरक्षित हो रहा है।

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