“लोकायुक्त में आय से अधिक संपत्ति का परिवाद लंबित, फिर भी फेसबुक पर ‘रामराज्य’ का दावा—धीरेन्द्र प्रताप सिंह के दोहरे चरित्र पर उठ रहे सवाल”
महराजगंज जनपद में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जन के गंभीर आरोपों से घिरे धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ धीरू एक बार फिर चर्चा में हैं। माननीय उप लोकायुक्त, उत्तर प्रदेश के समक्ष आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच प्रचलित होने के बावजूद, आरोपी द्वारा सोशल मीडिया पर “ईमानदारी, न्याय और रामराज्य” जैसे नैतिक मूल्यों का प्रचार करना लोगों के बीच तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर रहा है।
शिकायतकर्ता मनोज कुमार तिवारी, निवासी सिंहपुर, औराटार, ने उप लोकायुक्त कार्यालय में विस्तृत परिवाद दायर किया था, जिसमें आरोप है कि धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने “तथाकथित ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि” के रूप में प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए, अपने संस्थागत और गैर-संस्थागत स्रोतों से हजारों गुना अवैध संपत्ति अर्जित की है। तिवारी के अनुसार धीरेन्द्र प्रताप किसी भी श्रेणी में लोक सेवक नहीं आते, इसलिए उन्हें “लोक सेवक” के अधिकारों का लाभ नहीं दिया जा सकता।
उप लोकायुक्त कार्यालय से 1 नवंबर 2025 को जारी पत्र में शिकायतकर्ता से इस बात के पुष्टिकारक साक्ष्य मांगे गए कि आरोपी लोक सेवक की श्रेणी में आता है अथवा नहीं। इसके जवाब में मनोज तिवारी ने अपने विस्तृत प्रतिउत्तर में स्पष्ट किया कि आरोपी लोक सेवक नहीं हैं और कई वर्षों से राजनीतिक पहचान और प्रभाव का इस्तेमाल कर बड़ी मात्रा में संदिग्ध संपत्ति जुटाई है।

इसी बीच धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट पर जिस प्रकार के स्लोगन पोस्ट किए हैं, उसने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। उनके द्वारा लिखे गए वाक्य—
“राजनेता वही है जो राम की तरह वचन निभाए और लक्ष्मण की तरह जनता के साथ खड़ा रहे।”
“रामराज्य सिर्फ वादा नहीं—ईमानदारी, न्याय और समानता की जिम्मेदारी है।”
—ने जनमानस में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो व्यक्ति स्वयं भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरा हो, अवैध संपत्ति का मामला लोकायुक्त में लंबित हो, क्या वह स्वयं को ‘रामराज्य’ का प्रतीक प्रस्तुत कर सकता है?
धीरेन्द्र प्रताप सिंह स्वयं को
– अध्यक्ष, राजेश्वरी ज्ञानस्थली महाविद्यालय, सोनबरसा
– अध्यक्ष, भूमि विकास बैंक, निचलौल
– प्रभारी, सिसवा ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि
बताते हैं। परंतु शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन्हीं पदों और राजनीतिक संबंधों का उपयोग उन्होंने मनमानी संपत्ति अर्जन में किया है।
जनता और शिकायतकर्ताओं का मानना है कि लोकायुक्त की जांच निष्पक्ष और तेज गति से आगे बढ़नी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे। फिलहाल मामला राजनीतिक नारेबाज़ी और सोशल मीडिया प्रचार से ज़्यादा, तथ्यों और कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।