उच्च न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद 35 साल पुराने कब्जे को हटाने का आरोप, प्रधान व राजस्व कर्मियों पर मिलीभगत का गंभीर आरोप

महराजगंज।
जनपद महराजगंज के तहसील सदर अंतर्गत ग्राम मथनिया से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 35 वर्षों से काबिज भूमि को लेकर चल रहे न्यायिक विवाद के बावजूद कथित रूप से प्रधान और राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से कब्जा हटाने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़ित उमा शंकर प्रसाद ने जिलाधिकारी महराजगंज को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।

पीड़ित के अनुसार उनके पिता सुरेश पुत्र मोहर के नाम ग्राम सभा की गाटा संख्या 562, रकबा 0.077 हेक्टेयर भूमि का पट्टा पूर्व में विधिवत रूप से आवंटित हुआ था। उक्त भूमि पर बीते 35 वर्षों से उनके पिता का नाम खसरा-खतौनी एवं जोत बही में दर्ज चला आ रहा था। पीड़ित का कहना है कि बाद में पत्रावली उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा पट्टा निरस्त कर दिया गया।

पट्टा निरस्तीकरण के खिलाफ आयुक्त, गोरखपुर मंडल में अपील दायर की गई, जिसे 23 दिसंबर 2025 को निरस्त कर दिया गया। इसके उपरांत पीड़ित द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दाखिल की गई है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।

 

आरोप है कि जब मामला उच्च न्यायालय में लंबित है,

उसी दौरान ग्राम प्रधान एवं कुछ राजस्व कर्मियों द्वारा आपसी सांठगांठ कर पीड़ित के वर्षों पुराने कब्जे को आनन-फानन में हटाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना हो रही है, बल्कि पीड़ित परिवार पर मानसिक दबाव भी बनाया जा रहा है।

पीड़ित उमा शंकर प्रसाद ने जिलाधिकारी से मांग की है कि उच्च न्यायालय में याचिका की अंतिम सुनवाई तक भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप पर रोक लगाने का स्पष्ट आदेश दिया जाए। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित को न्याय कब तक मिलता है।

इसके पुर्व भी बरवां विद्यापति में प्रशासन ने दिखाया था राजनैतिक दबाव में कार्यवाही की जल्दबाजी तो माननीय उच्च न्यायालय ने किया था स्टे।

error: Content is protected !!