महराजगंज में आंगनबाड़ी भर्ती घोटाले का आरोप: बिना आपत्ति निस्तारण अंतिम सूची जारी करने की तैयारी, लाखों की वसूली का खेल उजागर

 

जनपद महराजगंज में आंगनबाड़ी सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। ताजा आरोपों के अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों पर सीधा प्रहार हो रहा है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार मनोज कुमार तिवारी ने इस पूरे प्रकरण को उठाते हुए गोरखपुर मंडल के आयुक्त को शिकायत पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि विभाग द्वारा अनंतिम सूची जारी किए जाने के बाद अभ्यर्थियों से आपत्तियां आमंत्रित करने और उनका निस्तारण करने की प्रक्रिया को दरकिनार किया जा रहा है। बिना आपत्ति निस्तारण के ही अंतिम सूची जारी करने की तैयारी चल रही है, जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है।

सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि इस भर्ती प्रक्रिया में भारी आर्थिक लेन-देन हो रहा है। आरोप है कि कई अभ्यर्थियों से चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक की अवैध वसूली की गई है। इतना ही नहीं, एक ही ग्राम सभा में कई उम्मीदवारों से धन लेकर “सेटिंग” का खेल खेला जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस कथित साजिश में विभागीय अधिकारियों, विशेष रूप से बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) और संबंधित ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक तंत्र की साख पर बट्टा लगाएगा, बल्कि सरकार की महिला एवं बाल विकास योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी असर डालेगा।

समाजसेवी ने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी सभी मूल पत्रावलियों को तलब कर निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है—क्या दोषी बच निकलेंगे या फिर भ्रष्टाचार पर लगाम कसते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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