निचलौल मदरसा नियम उल्लंघन
रिपोर्ट – मनोज कुमार तिवारी
महराजगंज।
जनपद के निचलौल स्थित मदरसा अरबिया अजीजिया मजहरूल उलूम में नियम, संविधान और सरकारी व्यवस्था को खुलेआम चुनौती देने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि मदरसे की प्रबंधन समिति का विवाद धारा 25(1) के तहत सक्षम अधिकारी एसडीएम निचलौल के समक्ष लंबित होने और समिति की वैधता समाप्त हो जाने के बावजूद, प्रबंधक आबिद अली और अध्यक्ष जमशेद अली ने दिसंबर माह में एक शिक्षक खालिद को कार्यवाहक प्रिंसिपल नियुक्त कर दिया। इतना ही नहीं, इस अवैध नियुक्ति के आधार पर वेतन भुगतान कराने का भी प्रयास किया गया।
जानकारी के अनुसार, मदरसा अरबिया अजीजिया मजहरूल उलूम की प्रबंध समिति की वार्षिक सूची 31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुकी है। नियमों के मुताबिक, सूची की वैधता समाप्त होते ही समिति और उसके पदाधिकारियों के सभी प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त, जब समिति का विवाद सक्षम अधिकारी के समक्ष लंबित होता है, तब Status Quo बनाए रखना अनिवार्य होता है और किसी भी प्रकार की नई नियुक्ति या पदभार सौंपना सीधे तौर पर निषिद्ध माना जाता है।
मदरसा सेवा नियमावली 2016 के नियम 12 और नियम 21 स्पष्ट रूप से कहते हैं कि प्रिंसिपल या कार्यवाहक प्रिंसिपल से संबंधित कोई भी निर्णय केवल वैध और पंजीकृत समिति द्वारा ही लिया जा सकता है, तथा प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार केवल कानूनसम्मत रूप से नियुक्त व्यक्ति को ही प्राप्त हो सकते हैं। ऐसे में विवादित और अपंजीकृत समिति द्वारा की गई यह नियुक्ति शुरू से ही शून्य (Void ab initio) मानी जाएगी।
इस पूरे मामले में प्रबंधक द्वारा तथाकथित “प्रशासनिक योजना” का हवाला दिया जाना भी कानूनन अस्थिर बताया जा रहा है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, कोई भी प्रशासनिक योजना न तो कानून है और न ही वह धारा 25(1) या मदरसा सेवा नियमावली 2016 को निष्प्रभावी कर सकती है।

कानूनी दृष्टि से यह मामला केवल नियम उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 16 (समान अवसर का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया) का भी सीधा उल्लंघन है। यदि इस अवैध नियुक्ति के आधार पर वेतन भुगतान किया गया या किया जाता है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आएगा, जिस पर वेतन रिकवरी, विभागीय जांच और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
इधर, खबर प्रकाशित होने के बाद मदरसा प्रबंधन के रवैये को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, मामले के उजागर होने से बौखलाए प्रबंधक आबिद अली, कार्यवाहक प्रिंसिपल खालिद अली और मदरसा कमेटी के एक सदस्य ने कथित तौर पर दलालों के माध्यम से दबाव बनाकर खबर पर अपना रसूख जमाने और पत्रकार पर प्रहार करने की कोशिश की। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इस खुले कानून उल्लंघन, सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग और पत्रकारिता पर दबाव के आरोपों पर कब और क्या सख़्त कदम उठाता है।