सोहगीवरवा वन्यजीव प्रभाग के जंगलों और उससे सटे इलाकों में तेंदुओं के बढ़ते हमलों ने आम जनजीवन की शांति छीन ली है। बीते एक पखवाड़े में अलग-अलग रेंजों में तेंदुए के हमलों की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को दहशत में डाल दिया है। दो अलग घटनाओं में बालिकाओं की जान चली गई, जबकि मधवलियां रेंज सहित अन्य क्षेत्रों में हुए हमलों ने ग्रामीणों के मन में भय और असुरक्षा की भावना और गहरी कर दी है।
इन घटनाओं के बाद यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या सोहगीवरवा के जंगलों को वन्यजीव प्रभाग अथवा संरक्षित क्षेत्र घोषित करना कहीं एक बड़ी प्रशासनिक भूल तो नहीं साबित हो रहा। वर्तमान परिदृश्य में तेंदुए जैसे हिंसक वन्यजीवों की बढ़ती संख्या मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। जंगल और आबादी के बीच की दूरी लगभग समाप्त हो चुकी है, जिससे संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
गौरतलब है कि सोहगीवरवा वन्यजीव प्रभाग कोई एकसार, विस्तृत वन क्षेत्र नहीं है, बल्कि छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखरा हुआ है। इन वन क्षेत्रों के चारों ओर बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतें स्थित हैं, जहां हजारों लोग निवास करते हैं। वन टांगिया गांवों की संख्या भी काफी अधिक है, जिनकी जीवनशैली प्रत्यक्ष रूप से जंगल और वन संसाधनों पर निर्भर है। ऐसे में जंगल और आबादी एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं, लेकिन यही नजदीकी अब मानव-वन्यजीव संघर्ष का कारण बन रही है।
आने वाले समय को लेकर आशंकाएं और भी गंभीर हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि तेंदुओं की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण और स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो हमलों की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ेंगी। खेतों, खलिहानों और यहां तक कि गांवों के भीतर भी आम आदमी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएगा।
इसी क्रम में महराजगंज जनपद के निचलौल क्षेत्र स्थित मधवलिया रेंज के 24 वन टांगिया गांवों में बुधवार को तेंदुए ने एक बच्ची पर हमला कर दिया। हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे तत्काल इलाज के लिए महराजगंज जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की खबर फैलते ही पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया।
सूचना मिलते ही वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई की। मधवलिया रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी अजीत कुमार, उप क्षेत्रीय वन अधिकारी अभिषेक सिंह, नवीन उपाध्याय और अवधराज सिंह सहित अन्य वनकर्मी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने चिकित्सकों से बच्ची के उपचार को लेकर चर्चा की और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों ने घायल बच्ची के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और विभाग की ओर से हर संभव आर्थिक व मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। बावजूद इसके, लगातार हो रही घटनाओं ने वन्यजीव प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और मानव जीवन की रक्षा को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब आवश्यकता है कि दीर्घकालिक, ठोस और मानवीय समाधान अपनाए जाएं, ताकि जंगल और इंसान के बीच संतुलन कायम रह सके और किसी और मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े।