महराजगंज जनपद के केएमसी मेडिकल कॉलेज पकड़ी में रैगिंग का एक गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के दो छात्रों के साथ द्वितीय वर्ष के सीनियर छात्रों द्वारा बेरहमी से मारपीट किए जाने का आरोप है। घटना 19 जनवरी 2026 की शाम लगभग 5 बजे की बताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित छात्र यशवर्दन सिंह एवं देवांश सिंह एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र हैं और वर्तमान में केएमसी मेडिकल कॉलेज, महाराजगंज में अध्ययनरत हैं। पीड़ितों का आरोप है कि कॉलेज के एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र—स्वप्नील जायसवाल, समर प्रताप सिंह, उन्मेश, उत्कर्ष आनंद, अथर्व गर्ग, उत्कर्ष सिंह एवं पुल्कित—ने एक समूह बनाकर उन्हें घेर लिया और रैगिंग देने से इनकार करने पर उनके साथ लात-घूंसे, जूतों, बेल्ट और लोहे की रॉड से निर्ममता से पिटाई की।

पीड़ित छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि हमलावरों ने न केवल शारीरिक हिंसा की, बल्कि मां-बहन की अश्लील गालियां दीं और जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के दौरान जब कॉलेज के गार्ड एवं शिक्षक मौके पर पहुंचे, तब जाकर बीच-बचाव हुआ। आरोप है कि इसके बावजूद सीनियर छात्रों ने पीड़ितों से जबरन जूते चटवाए, जो मानसिक उत्पीड़न का गंभीर उदाहरण है।
घटना के बाद पीड़ितों ने तत्काल 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी, जिस पर पुलिस मौके पर पहुंची। हालांकि, आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने प्रारंभ में पुलिस को छात्रों से मिलने नहीं दिया। बाद में कॉलेज प्रशासन द्वारा घायल छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों को सूचना दिए जाने के बाद वे अस्पताल पहुंचे और इसके पश्चात पीड़ितों को थाने लाकर तहरीर दी गई।
कोतवाली थाना महाराजगंज में दर्ज एफआईआर संख्या 0041/2026 के तहत आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 191(2), 115(2), 352 एवं 351(3) में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सभी आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।

इस घटना ने मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग पर प्रभावी नियंत्रण और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रैगिंग पर सख्त कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बावजूद इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि जमीनी स्तर पर नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है। अब देखना यह होगा कि कॉलेज प्रशासन और जिला पुलिस इस मामले में कितनी सख्ती से कार्रवाई करती है और पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने में कितना समय लगता है।