रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद में आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है। “केन्द्र विकल्प” के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बार जानबूझकर आपत्तियां (ऑब्जेक्शन) नहीं ली जा रही हैं, ताकि अनियमितताओं को दबाया जा सके।

जानकारी के मुताबिक, जिन ग्राम सभाओं में एक से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र हैं, वहां सभी केंद्रों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए और एक ही अभ्यर्थी को कई केंद्रों पर आवेदन करने की छूट दी गई। इसका परिणाम यह हुआ कि उच्च मेरिट वाले अभ्यर्थी कई केंद्रों पर प्रथम स्थान पर आ गए। नियमों के अनुसार, ऐसे अभ्यर्थी की नियुक्ति केवल एक ही केंद्र पर होनी चाहिए, जबकि अन्य केंद्रों पर दूसरे स्थान के अभ्यर्थी को मौका मिलना चाहिए था।
लेकिन आरोप है कि इस प्रक्रिया को दरकिनार कर बड़े स्तर पर खेल किया जा रहा है। प्रथम स्थान खाली होने के बावजूद दूसरे स्थान के पात्र अभ्यर्थियों को नजरअंदाज कर तीसरे और चौथे स्थान के अभ्यर्थियों का चयन किया जा रहा है। यह चयन कथित रूप से मोटी रकम लेकर किया जा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि एक से डेढ़ लाख रुपये तक की वसूली कर नियुक्तियां दी जा रही हैं। इस कथित भ्रष्टाचार का दायरा भी छोटा नहीं है—लगभग 300 से 350 पदों पर इस तरह की अनियमितताएं होने की बात सामने आ रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी महराजगंज में आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया हुई है लेकर हर बार आपत्तियां मांगी गई हैं लेकिन इस बार आपत्तियां ही नहीं ली जा रही हैं, जिससे यह मामला और भी संदिग्ध बन गया है।
स्थानीय अभ्यर्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में इसको लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो योग्य अभ्यर्थियों का हक मारा जाएगा और भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण मिलेगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर पारदर्शी जांच कराता है या फिर यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।