सम्बद्धता पर पुरे प्रदेश में कार्यवाही

रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी 

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में लंबे समय से चल रही अनियमित सम्बद्धता (अटैचमेंट) की व्यवस्था पर आखिरकार बड़ी कार्रवाई हो गई है। निदेशक एवं मुख्य अभियंता द्वारा जारी ताज़ा आदेश में प्रदेश भर में विभिन्न कार्यालयों में सम्बद्ध किए गए कार्मिकों की सम्बद्धता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले को प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है

जारी आदेश के अनुसार, वित्तीय वर्षों में विभिन्न कारणों—विशेषकर पारिवारिक परिस्थितियों और कार्यहित—के आधार पर सहायक अभियंता, अवर अभियंता और लिपिक वर्गीय कर्मचारियों को अस्थायी रूप से अन्य कार्यालयों में सम्बद्ध किया गया था। अब इन सभी आदेशों को निरस्त करते हुए निर्देश दिया गया है कि ऐसे सभी कर्मचारियों को तीन दिनों के भीतर उनके मूल तैनाती स्थल पर कार्यमुक्त कर भेजा जाए और इसकी सूचना निदेशालय को उपलब्ध कराई जाए।

इस पूरे मामले के पीछे महराजगंज के समाजसेवी अनिल कुमार गुप्ता का लगातार संघर्ष अहम माना जा रहा है। उन्होंने इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर विभागीय अधिकारियों तक कई बार शिकायतें दर्ज कराईं। बताया जाता है कि पांचवें अनुस्मारक के बाद विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की।

समाजसेवी द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, महराजगंज प्रखण्ड में एक स्टेनो पद पर कार्यरत कर्मचारी को पिछले कई वर्षों से नियमों के विपरीत सम्बद्ध रखा गया था, जबकि उस प्रखण्ड में उक्त पद सृजित ही नहीं था। साथ ही यह भी आरोप था कि कर्मचारी की मूल तैनाती गोरखपुर में होने के बावजूद उसे गैर-विभागीय कार्यों में लगाया गया, जो नियमों के खिलाफ है।

जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी में भी कई अहम तथ्य सामने आए। अधीक्षण अभियंता कार्यालय, गोरखपुर द्वारा दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया कि परिमण्डल स्तर पर स्टेनो का पद केवल गोरखपुर और देवरिया में स्वीकृत है, जबकि महराजगंज में ऐसा कोई पद सृजित नहीं है। इसके बावजूद वहां सम्बद्धता जारी रखना नियमों का उल्लंघन माना गया।

इस मामले में 25 अक्टूबर 2025 को जारी एक पूर्व आदेश में संबंधित स्टेनो को 31 मार्च 2026 तक महराजगंज में सम्बद्ध किया गया था। लेकिन आरटीआई के जरिए सामने आए तथ्यों और लगातार शिकायतों के बाद विभाग को अपने ही आदेशों की समीक्षा करनी पड़ी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में वर्षों से चल रही ‘सम्बद्धता संस्कृति’ पर प्रभाव डालेगा। अक्सर देखा गया है कि कर्मचारी व्यक्तिगत सुविधा या प्रभाव के आधार पर वर्षों तक मूल तैनाती से दूर रहकर कार्य करते हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है।

अब जब विभाग ने स्पष्ट रूप से सभी सम्बद्धताओं को समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया है, तो इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि कार्य प्रणाली में भी सुधार आने की उम्मीद है। साथ ही यह संदेश भी गया है कि नियमों के खिलाफ जाकर की गई कोई भी व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती।

फिलहाल, इस आदेश के अनुपालन पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि इसे सख्ती से लागू किया गया, तो यह उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक सुधारों में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।

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