रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

महराजगंज जनपद में बागापार से महराजगंज मार्ग पर चल रहे पुल और सड़क निर्माण कार्य को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक घटनाक्रम में बदल गया है। निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच संबंधित कार्य देख रहे मेठ अजय सिंह को पुलिस ने निवारक कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया है।

दरअसल, 1 मार्च 2026 को स्थानीय मीडिया प्लेटफॉर्म “पर्दाफाश न्यूज़ 24×7” ने इस मार्ग पर बन रही पुलियों में अनियमितताओं और मानकविहीन निर्माण को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। आरोप था कि पुरानी पुलिया के ऊपर ही नई पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह खबर सोशल मीडिया, पर्दा फाश न्यूज 24×7 के फेसबुक पर भी तेजी से वायरल हुई।
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इसी खबर के बाद अजय सिंह ने फेसबुक पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि एक स्वयंभू समाजसेवी उनसे पैसे की मांग कर रहा था, और पैसे न मिलने पर वह खुद को समाजसेवी बताकर विरोध कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इसका ऑडियो सबूत भी है।

इस पर “पर्दाफाश न्यूज़” ने जवाब देते हुए कहा कि यदि ऑडियो प्रमाण सही है तो उसे साझा किया जाए, और चैनल उसे पूरी जिम्मेदारी के साथ प्रसारित करेगा। इस सोशल मीडिया विवाद के बाद मामला और तूल पकड़ गया।
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता उमेश चंद मिश्र ने 3 अप्रैल 2026 को आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से पुलिस अधीक्षक महराजगंज को शिकायत दर्ज कराई। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य की निगरानी और जागरूकता फैलाने के कारण अजय सिंह ने उनके खिलाफ भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियां कीं। साथ ही, आमने-सामने होने पर उन्हें गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी भी दी गई।

शिकायत में उमेश मिश्र ने अपनी जान को खतरा बताते हुए अजय सिंह के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी। मामला गंभीर होने के कारण पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच के बाद बागापार पुलिस चौकी ने अजय सिंह के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170 के तहत कार्रवाई की। यह धारा पुलिस को संभावित अपराध को रोकने के लिए बिना वारंट गिरफ्तारी की अनुमति देती है। इसे निवारक गिरफ्तारी माना जाता है, जिसका उद्देश्य शांति व्यवस्था बनाए रखना होता है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में लगाए गए आरोपों की जांच में आपराधिक तत्व स्पष्ट नहीं पाए गए, लेकिन क्षेत्र में तनाव और शांति भंग की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया। अजय सिंह को गिरफ्तार कर नियमानुसार न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक कार्रवाई के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है और अब सभी की नजर आगे की जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई है।