जनपद महराजगंज से भी दो मदरसा सस्पेंड
ब्यूरो महराजगंज- रविन्द्र मिश्र
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने प्रदेश भर में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 18 मदरसों की मान्यता सस्पेंड कर दी है। इस फैसले के बाद इन मदरसों में पढ़ रहे हजारों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बन गया है। खासकर फरवरी में प्रस्तावित बोर्ड परीक्षाओं और शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
मदरसा बोर्ड की इस कार्रवाई का सीधा असर इन संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के वेतन पर पड़ा है। मान्यता सस्पेंड होने के चलते फिलहाल शिक्षकों का वेतन भुगतान रोक दिया गया है। इससे शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, वहीं शैक्षणिक व्यवस्था पर भी इसका मनोवैज्ञानिक असर देखा जा रहा है। मुंशी, मौलवी और आलिम जैसी कक्षाओं में अध्ययन कर रहे करीब एक हजार से अधिक छात्र इस समय सत्र के अंतिम चरण में हैं और आगामी बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
हालांकि, छात्रों को राहत देते हुए उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने स्पष्ट किया है कि जब तक किसी मदरसे की मान्यता पूरी तरह समाप्त नहीं होती, तब तक वहां पढ़ रहे छात्र-छात्राएं पहले की तरह बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि मान्यता सस्पेंड होने का प्रभाव केवल शिक्षकों के वेतन भुगतान पर पड़ेगा, न कि शैक्षणिक गतिविधियों या परीक्षा प्रक्रिया पर।
रजिस्ट्रार के अनुसार, फरवरी में होने वाली मदरसा बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं और जल्द ही परीक्षा कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि बोर्ड की ओर से छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।
दूसरी ओर, शिक्षकों के बीच वेतन को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। मदरसा बोर्ड का कहना है कि फिलहाल वेतन भुगतान शासन स्तर से रोका गया है। यदि संबंधित मदरसों की मान्यता बहाल होती है या मामला सुलझता है, तो वेतन भुगतान की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा सकती है। पिछले कुछ दिनों में लगातार मदरसों की मान्यता सस्पेंड किए जाने से शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि अलग-अलग कारणों और अनियमितताओं के आधार पर मदरसा बोर्ड यह कार्रवाई कर रहा है। बीते दो-तीन दिनों में ही चार मदरसों की मान्यता सस्पेंड की गई है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में और भी संस्थान बोर्ड की कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
जिन मदरसों की मान्यता सस्पेंड की गई है, उनमें प्रयागराज, अयोध्या, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, वाराणसी, अलीगढ़, कुशीनगर, लखनऊ और मुबारकपुर जैसे जिलों के मदरसे शामिल हैं। इन मदरसों की प्रशासनिक समितियों का कहना है कि बोर्ड का फैसला एकतरफा है और इससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
फिलहाल मदरसा बोर्ड के आश्वासन से छात्रों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन शिक्षकों का वेतन, संस्थानों की मान्यता बहाली और भविष्य की स्थिरता को लेकर चिंता बनी हुई है। इसी बीच, सस्पेंड किए गए मदरसों की प्रशासनिक टीम ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि न्यायालय में अपना पक्ष रखकर वे मान्यता बहाल कराने की कोशिश करेंगे।
कुल मिलाकर, मदरसा शिक्षा परिषद की इस कार्रवाई ने एक ओर प्रशासनिक सख्ती का संदेश दिया है, तो दूसरी ओर छात्रों और शिक्षकों के भविष्य को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें कोर्ट की कार्रवाई और मदरसा बोर्ड के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।