8 साल से महराजगंज में जमे पीसीयू जिला प्रबंधक पर भ्रष्टाचार का संगीन आरोप, मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज

ब्यूरो – रविन्द्र मिश्र 

महराजगंज जनपद में सहकारिता विभाग भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का गढ़ बनता जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण जिला प्रबंधक पीसीयू एवं डीसीएफ सचिव श्री अभिषेक यादव को लेकर सामने आया है, जिनके विरुद्ध मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40018726001357 के तहत गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उत्तर प्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी अधिकारी अधिकतम तीन वर्ष से अधिक एक ही स्थान पर तैनात नहीं रहेगा, तो फिर श्री अभिषेक यादव लगातार 8 वर्षों से एक ही जनपद महराजगंज में कैसे जमे हुए हैं? क्या विभागीय संरक्षण के बिना यह संभव है?

शिकायत के अनुसार, श्री अभिषेक यादव को कई विकास खंडों का प्रभार सौंपा गया है, लेकिन हकीकत यह है कि वे न तो कभी विकास खंड कार्यालयों में दिखाई देते हैं और न ही क्षेत्रीय निरीक्षण करते हैं। प्रशासनिक निगरानी के अभाव में सहकारी समितियों के सचिव पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं।

खाद वितरण प्रणाली में भारी अनियमितताओं के आरोप हैं। किसानों को समय पर खाद नहीं मिलती, वहीं दूसरी ओर कागजों में वितरण पूरा दिखा दिया जाता है। शिकायत में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि किसानों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है और अधिकारी केवल मुख्यालय में बैठकर फाइलों का खेल खेल रहे हैं।

मामला यहीं खत्म नहीं होता। आरोप है कि श्री अभिषेक यादव के पटल से संबंधित समितियों एवं क्रय केंद्रों पर विगत आठ वर्षों से फर्जी किसानों के नाम पर खरीद दिखाकर चुनिंदा लोगों के खातों में लाखों-करोड़ों रुपये की धनराशि भेजी गई। यह सीधे-सीधे सरकारी धन की लूट का मामला बनता है।

सूत्रों के अनुसार, इन मामलों की जांच पहले से ही माननीय लोकायुक्त के समक्ष प्रचलित है और जांच महराजगंज जनपद में चल रही है। जांच के दौरान भूमि संबंधी मामलों में भी गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं, जिससे अधिकारी की भूमिका और अधिक संदिग्ध हो जाती है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी गंभीर जांच लंबित होने के बावजूद संबंधित अधिकारी को अब तक उसी जिले में बनाए रखा गया है। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि कहीं जांच को प्रभावित करने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा?

अब मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद सवाल यह है कि क्या सरकार केवल पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर नंबर जारी कर देने तक सीमित रहेगी, या फिर वास्तव में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई होगी?

किसानों, सहकारिता कर्मियों और आम जनता की निगाहें अब शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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