रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

महराजगंज जनपद की तहसील सदर में राजस्व न्यायालय से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें प्रार्थिनी पार्वती मिश्रा ने तहसीलदार सदर पंकज कुमार शाही, पेशकार उत्कर्ष श्रीवास्तव एवं अन्य कर्मचारियों पर नियमों की अनदेखी कर मनमानी करने का आरोप लगाया है। यह मामला पार्वती बनाम गंगा वाद संख्या 138750/1033 से संबंधित है, जो वरासत के विवाद को लेकर चल रहा था।

प्रार्थिनी के अनुसार, उक्त वाद में दिनांक 09/09/2025 को पूर्व आदेश (29/05/2003) को विधिसम्मत तरीके से बहाल किया गया था। यह आदेश प्रभावी था और इसमें स्थगन का कोई औचित्य नहीं था। बावजूद इसके, आरोप है कि बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए, बिना तिथि व फर्दकाम प्रविष्टि दर्ज किए, उक्त आदेश को गुप्त रूप से स्थगित कर दिया गया।





इतना ही नहीं, प्रार्थिनी का कहना है कि बाद में उसी आदेश को बिना किसी विधिक आधार और बिना फर्दकाम प्रविष्टि के निरस्त भी कर दिया गया। 25/09/2025 और 20/12/2025 को पारित आदेशों को भी संदेहास्पद बताते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्यवाही राजस्व संहिता 2006 के विरुद्ध की गई है।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि न तो उन्हें और न ही उनके अधिवक्ताओं को कोई नोटिस या सूचना दी गई। फर्दकाम की नकल प्राप्त करने के लिए भी उन्हें अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े और काफी मशक्कत के बाद जब दस्तावेज मिले, तब इस कथित अनियमितता का खुलासा हुआ।


मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए प्रार्थिनी ने IGRS, तहसील समाधान दिवस और उपजिलाधिकारी को भी प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई न होने पर अब उन्होंने राजस्व मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रार्थिनी ने अपने शिकायती पत्र में मांग की है कि संबंधित केस की पत्रावली व केस डायरी तलब कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने 09/09/2025 के मूल आदेश को पुनः प्रभावी करने की भी मांग की है।
यह मामला राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।