रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

महराजगंज। जनपद के जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय में एक बार फिर विवादों का केंद्र बनते हुए एक गंभीर मामला सामने आया है। हिंदू युवा वाहिनी से जुड़ा बताया जा रहा व्यक्ति सतीश सिंह पर महिला डीपीआरओ श्रेया मिश्रा के साथ अभद्रता, दबंगई और गुंडागर्दी करने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कर्मचारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
प्रत्यक्षदर्शियों और कर्मचारियों के अनुसार, सतीश सिंह ने कार्यालय में पहुंचकर न सिर्फ मर्यादा की सीमाएं लांघीं, बल्कि महिला अधिकारी के साथ भी असम्मानजनक व्यवहार किया। इस दौरान वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों ने किसी तरह स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन पूरे कार्यालय में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। आरोप है कि सतीश सिंह पहले भी कई बार अधिकारियों, कर्मचारियों और यहां तक कि पत्रकारों से भी विवाद कर चुका है। कई लोगों ने उस पर जान से मारने की धमकी देने और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस घटना के विरोध में कर्मचारी संघ के विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी महराजगंज को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 3 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होती है, तो वे सामूहिक कार्य बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे।
सूत्रों के मुताबिक, सतीश सिंह खुद को प्रभावशाली बताकर सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करता रहा है। यह भी आरोप है कि वह अपनी पत्नी के ग्राम प्रधान होने का लाभ उठाते हुए स्वयं प्रधान प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। इतना ही नहीं, उस पर फर्जी हस्ताक्षर और मोहर का इस्तेमाल कर ग्राम सभा सोहास विकास खंड पनियरा से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने और सरकारी धन के भुगतान में अनियमितता करने के भी आरोप लगे हैं।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि इन दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए, तो बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा हो सकता है। इस संबंध में भी जांच की मांग उठ रही है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह मामला संवेदनशील होता जा रहा है, क्योंकि आरोपी का नाम हिंदू युवा वाहिनी से जुड़ा बताया जा रहा है, जो कि योगी आदित्यनाथ से संबद्ध संगठन माना जाता है। ऐसे में विपक्ष और स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई कर पाएगा या राजनीतिक दबाव हावी रहेगा।
वहीं, कुछ लोगों का आरोप है कि प्रदेश में जातिगत और राजनीतिक संरक्षण के कारण इस तरह के मामलों में अक्सर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो पाती। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अब सबकी नजरें जिलाधिकारी महराजगंज पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर प्रकरण में क्या रुख अपनाते हैं। क्या प्रशासन कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा — यह आने वाला समय ही बताएगा।
फिलहाल, कर्मचारी संगठनों की चेतावनी और बढ़ते दबाव के बीच यह मामला जनपद में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।