महराजगंज में बढ़ा सियासी और प्रशासनिक घमासान: सोहास ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों से गरमाई राजनीति

रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी 

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महराजगंज जनपद में इन दिनों प्रशासनिक और सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। सोहास ग्राम पंचायत से जुड़ा मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, जिसमें ग्राम प्रधान प्रतिनिधि और हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व जिला संयोजक सतीश सिंह केंद्र में हैं। डीपीआरओ कार्यालय में हुए विवाद के बाद जहां कर्मचारी संगठनों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तीन दिन के भीतर कार्रवाई की मांग की है,

वहीं दूसरी ओर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) से मिलकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इसी बीच एक स्थानीय समाजसेवी ने इस पूरे मामले को नया मोड़ देते हुए ग्राम पंचायत सोहास में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। समाजसेवी द्वारा गोरखपुर मंडल के आयुक्त को भेजे गए शिकायती पत्र में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान विकास कार्यों में भारी गड़बड़ी का दावा किया गया है।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत में कई फर्मों—जैसे राजलक्ष्मी ह्यूम पाइप, माँ लक्ष्मी ट्रेडर्स, अंबिका इलेक्ट्रॉनिक्स और विश्वकर्मा इंटरप्राइजेज—को फर्जी बिल-बाउचर के आधार पर भुगतान किया गया, जो शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसके अलावा यह भी आरोप है कि ग्राम प्रधान द्वारा अपने निजी विद्यालय में पंचायत के विकास कार्यों की धनराशि का उपयोग किया गया, जो नियमों के विपरीत है।

सबसे गंभीर आरोपों में यह भी शामिल है कि पंचायत से जुड़े दस्तावेजों पर ग्राम प्रधान की जगह उनके पति द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसकी पुष्टि फॉरेंसिक जांच से संभव बताई जा रही है। वहीं eGramSwaraj पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार स्वच्छता अभियान और इंडिया मार्का हैंडपंप मरम्मत के नाम पर बड़ी रकम निकाली गई, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य नहीं होने का दावा किया गया है।

मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया जब कुछ तस्वीरों के आधार पर ब्राह्मण समाज के लोगों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि एक विशेष समुदाय के खिलाफ लामबंदी की जा रही है, जो सामाजिक संतुलन के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग किया है और कहा है कि यदि इस प्रकार की राजनीति जारी रही, तो ब्राह्मण संगठन भी मैदान में उतरकर विरोध दर्ज कराएंगे।

फिलहाल, मामला प्रशासन और राजनीति के बीच संतुलन की परीक्षा बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं।

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