रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

महराजगंज। उत्तर प्रदेश के ग्राम रोजगार सेवकों की हालत आज बेहद चिंताजनक बनी हुई है। मात्र 7788 रुपये प्रतिमाह मानदेय पर कार्य कर रहे ये कर्मचारी पिछले 8 माह से भुगतान न मिलने के कारण गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं। उ.प्र. ग्राम रोजगार सेवक संघ ने माननीय सांसद एवं राज्य मंत्री Pankaj Chaudhary को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है।

संघ का कहना है कि अगस्त 2025 से अब तक मानदेय न मिलने के बावजूद ग्राम रोजगार सेवक लगातार कार्य कर रहे हैं। Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (मनरेगा) के साथ-साथ SIR 2025-26, फार्मर रजिस्ट्री और एग्री स्टैक जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का दायित्व भी इन्हीं के कंधों पर है। इसके बावजूद समय पर वेतन न मिलना उनके साथ अन्याय जैसा है।

रोजगार सेवकों ने बताया कि जब पूरे देश में दशहरा, दीपावली, होली और Eid al-Fitr जैसे त्योहार खुशियों के साथ मनाए जाते हैं, तब उनके घरों में सन्नाटा और चिंता का माहौल होता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और परिवार का भरण-पोषण करना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। “7788 रुपये में गुजारा मुश्किल था, और अब जब वह भी नहीं मिल रहा, तो जीवन संकट में है,” एक रोजगार सेवक ने कहा।
संघ ने अपनी मांगों में 8 माह का बकाया मानदेय तत्काल जारी करने, मानदेय को बढ़ाकर 35,000 रुपये प्रतिमाह करने, तथा नियमित भुगतान के लिए अलग बजट व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात रखी है। साथ ही 19 वर्षों से संविदा पर कार्यरत हजारों रोजगार सेवकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और पूर्व में घोषित नीतियों को लागू करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है।
ग्राम रोजगार सेवकों ने सरकार से अपील की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो उनके परिवारों के लिए हर त्योहार यूं ही फीका पड़ता रहेगा।