सिसवा ब्लॉक में कार्रवाई पर सवाल: दो अधिकारियों के विवाद में एकतरफा ट्रांसफर, संरक्षण किसे?

सिसवा विकास खण्ड, जनपद महराजगंज में विभागीय निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। खण्ड विकास अधिकारी सिसवा द्वारा उपायुक्त स्वतः रोजगार को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि ब्लॉक मिशन मैनेजर श्री रविशंकर मिश्र एवं श्री अमित जायसवाल के बीच आपसी तालमेल न होने के कारण आए दिन विवाद होता है, जिससे विभागीय कार्य बाधित हो रहा है और किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है। पत्र के साथ सहायक विकास अधिकारी (आईएसबी) का मूल पत्र संलग्न कर दोनों अधिकारियों पर आवश्यक कार्रवाई एवं स्थानांतरण का अनुरोध किया गया था।

हालांकि, इस संस्तुति के बाद जो कार्रवाई सामने आई, उसने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने एकतरफा निर्णय लेते हुए केवल रविशंकर मिश्र को ही कार्रवाई के दायरे में लिया और उनका स्थानांतरण कर दिया गया, जबकि अमित जायसवाल को कथित संरक्षण प्रदान करते हुए पूर्ववत पद पर बहाल रखा गया। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब मूल पत्र में दोनों अधिकारियों के बीच विवाद का स्पष्ट उल्लेख था।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यदि विवाद दोनों पक्षों से संबंधित था, तो कार्रवाई भी समान और निष्पक्ष होनी चाहिए थी। केवल एक अधिकारी पर कार्रवाई करना न सिर्फ पक्षपात की आशंका को जन्म देता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि प्रशासनिक निर्णयों में प्रभाव और संरक्षण की भूमिका हो सकती है। इससे विभागीय मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ना स्वाभाविक है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले की निष्पक्ष जांच कर दोनों पक्षों की भूमिका का आकलन किया जाना आवश्यक था। यदि किसी एक की गलती अधिक पाई जाती, तो कारणों का स्पष्ट उल्लेख कर कार्रवाई की जाती। लेकिन वर्तमान निर्णय प्रक्रिया ने विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई है।

अब सवाल यह है कि क्या उच्च अधिकारी इस एकतरफा कार्रवाई की समीक्षा करेंगे? क्या निष्पक्ष जांच कर वास्तविक जिम्मेदारी तय होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। सिसवा ब्लॉक का यह प्रकरण प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।

error: Content is protected !!