महराजगंज: बुद्ध इंटर कॉलेज में एकल संचालन लागू, प्रबंध समिति चुनाव टला—जांच के बीच बढ़ी हलचल

रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी 

 

पर्दा फाश न्यूज के संपादक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार तिवारी और सुशील कुमार मिश्र के पैरोकार के प्रयासो ने लाया रंग।

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महराजगंज जनपद के बुद्धनगर अड्डा बाजार स्थित महात्मा बुद्ध इंटर कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) द्वारा जारी “एकल संचालन आदेश” ने न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि लंबे समय से चल रहे विवादों और आरोपों को भी नई दिशा दे दी है। यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब प्रबंध समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और नई समिति का गठन अब तक नहीं हो पाया है।

जानकारी के अनुसार, देवदह एजुकेशनल सोसाइटी के अंतर्गत संचालित इस विद्यालय में पूर्व में गठित प्रबंध समिति का कार्यकाल 15 मार्च 2026 को समाप्त हो गया। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन और प्रधानाचार्य द्वारा कई बार प्रबंध समिति के चुनाव कराने के लिए चुनाव पर्यवेक्षक की मांग की गई। इसके बावजूद सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स सोसाइटीज एवं चिट्स, गोरखपुर द्वारा वैध सदस्यों की सूची उपलब्ध नहीं कराई जा सकी, जिससे चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

ऐसी स्थिति में जिला विद्यालय निरीक्षक ने उत्तर प्रदेश वेतन वितरण अधिनियम 1971 के तहत हस्तक्षेप करते हुए विद्यालय के संयुक्त खाते का “एकल संचालन” लागू कर दिया। अब वित्त एवं लेखाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा, महराजगंज को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने एकल हस्ताक्षर से शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन भुगतान सुनिश्चित करें। प्रशासन का मानना है कि इससे वेतन वितरण में पारदर्शिता आएगी और किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पर रोक लगेगी।

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़ा कारण मंडल स्तर पर चल रही जांच को भी माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, आयुक्त गोरखपुर मंडल द्वारा कई मामलों में जांच चल रही है, जिससे संबंधित अधिकारियों में दबाव की स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि सहायक रजिस्ट्रार और जिला विद्यालय निरीक्षक चाहकर भी प्रबंध समिति का चुनाव नहीं करा सके, क्योंकि जांच के दायरे में कई संवेदनशील तथ्य सामने आने की आशंका है।

इसके अलावा, एक प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़े अन्य मामले में भी आयुक्त द्वारा उच्च स्तरीय जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कारण संबंधित विभागों में हड़कंप मचा हुआ है और आने वाले समय में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

स्थानीय स्तर पर इस आदेश को विद्यालय में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से विद्यालय के प्रधानाचार्य और प्रबंधन पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में एकल संचालन लागू होने से अब सीधे प्रशासन की निगरानी में वेतन भुगतान होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, बुद्ध इंटर कॉलेज का यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे और कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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