न्यूज़ रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी पर्दा फाश न्यूज 24×7
महराजगंज जनपद के मिठौरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़हरामीर में मनरेगा योजना के तहत एक गंभीर डिजिटल अनियमितता सामने आई है। एनएमएमएस (NMMS App) के माध्यम से दर्ज की गई दैनिक उपस्थिति और अपलोड की गई ग्रुप फोटोज़ में भारी विरोधाभास पाए गए हैं, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका गहराती जा रही है।

प्राप्त विवरण के अनुसार बड़हरामीर पंचायत में दो अलग-अलग कार्यों—
(1) नहर पुल से मुंडेरा कला संपर्क मार्ग पर मिट्टी कार्य तथा

(2) द्रोपती की आबादी से पानी टंकी होते हुए पिच रोड तक चकबंध पर मिट्टी कार्य—

के अंतर्गत कुल 17 मस्टर रोल अपलोड किए गए हैं। इन मस्टर रोल्स में कुल 166 मजदूरों की उपस्थिति दर्शाई गई है। मस्टर रोल अपलोड करते समय महिला व पुरुष श्रमिकों की संख्या भी दिखाई गई है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग नजर आती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सभी मस्टर रोल्स में केवल लगभग 10 महिला मजदूरों की ही तस्वीरें बार-बार अपलोड की गई हैं। ग्रुप फोटो-1 और ग्रुप फोटो-2 में भी वही सीमित महिला चेहरे दिखाई देते हैं, जबकि कागजों में सैकड़ों मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर दी गई है। इससे स्पष्ट होता है कि वास्तविक कार्यस्थल पर उतनी संख्या में श्रमिक मौजूद ही नहीं थे, जितनी संख्या में उपस्थिति दिखाई गई।
सूत्रों के अनुसार, इस फर्जी उपस्थिति के जरिए प्रतिदिन लगभग ₹41,862 की सरकारी राशि का चपत लगाया जा रहा है। आरोप है कि यह पूरा खेल संबंधित रोजगार सेवक, एपीओ मिठौरा, ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की मिलीभगत से अंजाम दिया जा रहा है। एनएमएमएस ऐप जैसी पारदर्शी व्यवस्था को भी फर्जी फोटो और मनगढ़ंत उपस्थिति के जरिए भ्रष्टाचार का औजार बना दिया गया है।
फोटो के टाइम-स्टैम्प, जियो को-ऑर्डिनेट्स और अपलोड टाइमिंग से भी संदेह और गहरा होता है, क्योंकि अलग-अलग मस्टर रोल्स में एक जैसी तस्वीरें और सीमित चेहरे दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना की साख पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सबसे दुखद पहलू यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में मूकदर्शक बने हुए हैं। न तो समय रहते जांच की जा रही है और न ही दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है, जिससे यह आशंका और प्रबल होती है कि भ्रष्टाचार को मौन संरक्षण प्राप्त है।
अब जरूरत है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, एनएमएमएस डेटा, फोटो, जियो लोकेशन और वास्तविक श्रमिकों का भौतिक सत्यापन हो तथा दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि मनरेगा जैसी योजना को लूट का माध्यम बनने से बचाया जा सके।