पीडब्ल्यूडी में करोड़ों के घोटाले पर लोकायुक्त सख्त, महराजगंज प्रकरण की जांच स्वीकार

न्यूज़ रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी

उत्तर प्रदेश के जनपद महराजगंज में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी प्रशासनिक हलचल देखने को मिली है। लंबे समय से लंबित शिकायतों और सतर्कता विभाग की निष्क्रियता के बाद अब माननीय लोकायुक्त उत्तर प्रदेश ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए औपचारिक जांच स्वीकार कर ली है। यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार मनोज कुमार तिवारी द्वारा की गई सतत शिकायतों के परिणामस्वरूप सामने आई है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने वित्तीय वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के दौरान पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड महराजगंज में टेंडरों की प्रक्रिया और बिलो की धनराशि के भुगतान में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। आरोप है कि बिलो गए टेंडरों की वह धनराशि, जिसे विभागीय नियमों के अनुसार शासन को वापस किया जाना चाहिए था, उसे तत्कालीन अधिशासी अभियंता, संबंधित जेई, ठेकेदारों एवं उनकी फर्मों के माध्यम से अवैध रूप से निकालकर आपसी बंदरबांट कर लिया गया।

शिकायतकर्ता मनोज कुमार तिवारी ने इस गंभीर वित्तीय अनियमितता की जानकारी सबसे पहले 24 फरवरी 2025 को प्रमुख सचिव (गृह/सतर्कता) उत्तर प्रदेश शासन को लिखित रूप में दी थी। इसके बाद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो 23 जुलाई 2025 को उन्होंने मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से पत्र भेजकर सतर्कता जांच की मांग दोहराई। बावजूद इसके, संबंधित विभागों द्वारा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

लगातार उपेक्षा से आहत होकर शिकायतकर्ता ने अंततः 8 जनवरी 2026 को माननीय लोकायुक्त, उत्तर प्रदेश को विस्तृत शिकायत पत्र प्रेषित किया। इस पत्र में पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड में अतिरिक्त मद की धनराशि में की गई कथित करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए त्वरित जांच की मांग की गई थी।

लोकायुक्त प्रशासन ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए शिकायत को स्वीकार करते हुए आवेदक को आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। लोकायुक्त कार्यालय द्वारा जारी पत्र में परिवाद के निर्धारित प्रपत्र को पूर्ण रूप से भरने, आरोपी लोक सेवक की वर्तमान तैनाती का विवरण देने, शपथ पत्र, साक्ष्य तथा प्रतिभूति धनराशि वापसी हेतु बैंक विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इन औपचारिकताओं को पूर्ण कर 10 फरवरी 2026 तक प्रस्तुत करने को कहा गया है, ताकि नियमित परिवाद के रूप में मामले की जांच आगे बढ़ाई जा सके।

लोकायुक्त द्वारा शिकायत स्वीकार किए जाने को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो पीडब्ल्यूडी से जुड़े कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। वहीं शिकायतकर्ता का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी धन की लूट और सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ है।

अब सबकी निगाहें लोकायुक्त की जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि महराजगंज पीडब्ल्यूडी में हुए कथित करोड़ों के घोटाले की सच्चाई क्या है और दोषियों पर कब और कैसी कार्रवाई होती है।

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